जिसने अपने साहस के सामने पर्वत, नाले, नदी, समुद्र चोटी व घाटी, जंगल, शेर, हाथी आदि को कुछ न समझा। वह आज क्षण भर में मृत्यु के कराल गाल में समा गया। बीमारी ने उन्हें सात ही दिन में ऐसा कमजोर बना दिया कि उनकी आत्मा को शरीर त्यागना पड़ा, जिस शरीर से उन्होंने ऐसे बड़े बड़े काम किये जिससे भारत का इतिहास भरा पड़ा है। खेद है कि वह शिवाजी अपनी थोड़ी आयु में ही इस संसार से चल दिये कुछ आश्चर्य की बात न थी यदि
118 छत्रपति शिवाजी
शिवाजी
जिसने अपने साहस के सामने पर्वत, नाले, नदी, समुद्र चोटी व घाटी, जंगल, शेर, हाथी आदि को कुछ न समझा। वह आज क्षण भर में मृत्यु के कराल गाल में समा गया। बीमारी ने उन्हें सात ही दिन में ऐसा कमजोर बना दिया कि उनकी आत्मा को शरीर त्यागना पड़ा, जिस शरीर से उन्होंने ऐसे बड़े बड़े काम किये जिससे भारत का इतिहास भरा पड़ा है। खेद है कि वह शिवाजी अपनी थोड़ी आयु में ही इस संसार से चल दिये कुछ आश्चर्य की बात न थी यदि
118 छत्रपति शिवाजी
शिवाजी