कुछ दिन और जीवित रहते तो यवन राज्य की पक्की इमारत को और ठोकर लगाते, परन्तु मृत्यु किसी आवश्यक कार्य की प्रतीक्षा नहीं करती है। संसार में यदि कोई ऐसा समय है कि जिससे किन्न्चित् मात्र भी मोहलत नहीं मिलती तो वह मृत्यु है। शिवाजी के इस प्रकार इस अवस्था में परलोकवास से उनकी जाति को जितना दुःख हुआ है उसका अनुमान करना कठिन है।
अध्याय 14
शिवाजी का चालचलन
शिवाजी मर गये और मरना ही सच है परन्तु इसमें सन्देह है कि शिवाजी जैसी
कुछ दिन और जीवित रहते तो यवन राज्य की पक्की इमारत को और ठोकर लगाते, परन्तु मृत्यु किसी आवश्यक कार्य की प्रतीक्षा नहीं करती है। संसार में यदि कोई ऐसा समय है कि जिससे किन्न्चित् मात्र भी मोहलत नहीं मिलती तो वह मृत्यु है। शिवाजी के इस प्रकार इस अवस्था में परलोकवास से उनकी जाति को जितना दुःख हुआ है उसका अनुमान करना कठिन है।
अध्याय 14
शिवाजी का चालचलन
शिवाजी मर गये और मरना ही सच है परन्तु इसमें सन्देह है कि शिवाजी जैसी