ओर नाम पैदा किया, सदैव अपने आपको भंयकर आपत्तियों से बचाया। तुम को उनकी विद्वत्ता एवं गम्भीरता से लाभ उठाने की अनेक अवसर मिलते रहे। मुझ को भी जैसा अवसर मिला मैंने भी उनका यथाशक्ति अनुसरण कर लिया। यह वैरागीपन तुम्हें शोभा नहीं देता। आपने राज्य-कार्य तथा कोषादि ऐसे मनुष्य के हाथ में दे दिये हैं जो समय पड़ने पर सब को पचा जाय। क्या तुम को यह उचित है कि वैराग्य धारण करके अपनी शारीरिक अवस्था का सर्वनाश कर दो, यह कैसी विद्वत्ता
ओर नाम पैदा किया, सदैव अपने आपको भंयकर आपत्तियों से बचाया। तुम को उनकी विद्वत्ता एवं गम्भीरता से लाभ उठाने की अनेक अवसर मिलते रहे। मुझ को भी जैसा अवसर मिला मैंने भी उनका यथाशक्ति अनुसरण कर लिया। यह वैरागीपन तुम्हें शोभा नहीं देता। आपने राज्य-कार्य तथा कोषादि ऐसे मनुष्य के हाथ में दे दिये हैं जो समय पड़ने पर सब को पचा जाय। क्या तुम को यह उचित है कि वैराग्य धारण करके अपनी शारीरिक अवस्था का सर्वनाश कर दो, यह कैसी विद्वत्ता