से यथायोग्य कार्य लेते हुए संसार में यश पैदा करते रहों जब ऐसा होगा तो तुम्हारी कीर्ति और साहस को सुनकर हमारा चित्त शान्त होगा। तुम्हारी इस दशा को देखते हुए हमारा चित्त महान् शोकसागर में डूबा हुआ है। अतएव उठो! क्मर बांध अपनी अवस्था पर ध्यान दो और मेरे चित्त के दुःख को दूर करो। यह आयु तुम्हारे वैराग्य धारण करने के लिए नहीं वरन् बड़े बड़े कार्य करके यश पैदा करने के लिए है। हां वृद्वावस्था का समय तो वैराग्य धारण करने का होता
से यथायोग्य कार्य लेते हुए संसार में यश पैदा करते रहों जब ऐसा होगा तो तुम्हारी कीर्ति और साहस को सुनकर हमारा चित्त शान्त होगा। तुम्हारी इस दशा को देखते हुए हमारा चित्त महान् शोकसागर में डूबा हुआ है। अतएव उठो! क्मर बांध अपनी अवस्था पर ध्यान दो और मेरे चित्त के दुःख को दूर करो। यह आयु तुम्हारे वैराग्य धारण करने के लिए नहीं वरन् बड़े बड़े कार्य करके यश पैदा करने के लिए है। हां वृद्वावस्था का समय तो वैराग्य धारण करने का होता