जलालुद्दीन की सेना है। अब उसके पांव उखड़ गये, उसके सिपाई युद्व क्षेत्र से भाग गये और मुसलमानों की विजय हुई। दुर्भाग्य इसे की कहें
विज्ञप्ति 19
कि रसद की सामग्री में जिन्हें आटे के बोरे समझा गया था वे वस्तुतः नमक के बोरे थे। अब राजा रामदेव राय ने पर्याप्त धन तथा राज्य का कुछ इलाका अलाउद्दीन को सौंपने में ही अपनी भलाई समझी और सन्घि कर ली।
इसके बाद अलाउद्दीन के शासन काल में उसके सेनापति मलिक काफूर ने तीन बार दक्षिण पर चढ़ाई की,
जलालुद्दीन की सेना है। अब उसके पांव उखड़ गये, उसके सिपाई युद्व क्षेत्र से भाग गये और मुसलमानों की विजय हुई। दुर्भाग्य इसे की कहें
विज्ञप्ति 19
कि रसद की सामग्री में जिन्हें आटे के बोरे समझा गया था वे वस्तुतः नमक के बोरे थे। अब राजा रामदेव राय ने पर्याप्त धन तथा राज्य का कुछ इलाका अलाउद्दीन को सौंपने में ही अपनी भलाई समझी और सन्घि कर ली।
इसके बाद अलाउद्दीन के शासन काल में उसके सेनापति मलिक काफूर ने तीन बार दक्षिण पर चढ़ाई की,