तक देश में मजहब के नाम पर पक्षपात की बहुत कम घटनाएं हुई। शाहजहां के दरबार में राजपुतों का वर्चस्व था और वे सम्मान प्राप्त कर चुके थे। यह शाहजहां के समय की बात है कि उसके एक बहुत बड़े मुसलमान सरदार मौहम्मत खां ने
विज्ञप्ति 21
अमरसिंह राठौर का अपमान करना चाहा। मौहम्मत खां को इस बात का घमण्ड था कि बादशाह का उससे पारिवारिक सम्बम्ध है तथापि अमरसिंह ने भरे दरबार में मौहम्मत खां का सिर धड़ से अलग कर दिया। खुद बादशाह महलों
तक देश में मजहब के नाम पर पक्षपात की बहुत कम घटनाएं हुई। शाहजहां के दरबार में राजपुतों का वर्चस्व था और वे सम्मान प्राप्त कर चुके थे। यह शाहजहां के समय की बात है कि उसके एक बहुत बड़े मुसलमान सरदार मौहम्मत खां ने
विज्ञप्ति 21
अमरसिंह राठौर का अपमान करना चाहा। मौहम्मत खां को इस बात का घमण्ड था कि बादशाह का उससे पारिवारिक सम्बम्ध है तथापि अमरसिंह ने भरे दरबार में मौहम्मत खां का सिर धड़ से अलग कर दिया। खुद बादशाह महलों