अत्याचार करने शुरू किये। यहां तक कि सिखों पर सीमातीत अत्याचार करने शुरू किये। यहां तक कि सिख गुरूओं का भी वध कर दिया गया। किन्तू असन्तोष की जो चिन्गारी सुलगी वह अब बुझने वाली नहीं थी। गुरू अर्जुन ने विपत्तियां झेली किन्तु धर्म नहीं छोड़ा। मतीसिंह तथा अन्य अनके सिखों ने धर्म के लिए दुःख सहे।
24 छत्रपति शिवाजी
गुरू तेगबहादुर के बलिदान ने इस चिनगारी को आग का रूप दे दिया। उनके प्रिय पुत्रों ने अपने पिता के जीवन समर्पण
अत्याचार करने शुरू किये। यहां तक कि सिखों पर सीमातीत अत्याचार करने शुरू किये। यहां तक कि सिख गुरूओं का भी वध कर दिया गया। किन्तू असन्तोष की जो चिन्गारी सुलगी वह अब बुझने वाली नहीं थी। गुरू अर्जुन ने विपत्तियां झेली किन्तु धर्म नहीं छोड़ा। मतीसिंह तथा अन्य अनके सिखों ने धर्म के लिए दुःख सहे।
24 छत्रपति शिवाजी
गुरू तेगबहादुर के बलिदान ने इस चिनगारी को आग का रूप दे दिया। उनके प्रिय पुत्रों ने अपने पिता के जीवन समर्पण