छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

से शिक्षा लेकर धर्म के लिए सर्वस्व बलिदान करने की प्रतिज्ञा की । जिस धर्मयज्ञ में गुरू तेग बहादुर ने स्वयं की बलि दी थी, उसमें उनके पुत्र गुरू गोविन्द सिंह ने अपने चारों पुत्रों की आहुति दे दी। दशम गुरू गोविन्द सिंह ने एक हाथ में भक्ति का प्याला उठाया तो दूसरे हाथ में जाति रक्षा के लिए तलवार धारण की । संसार ने गुरू जी की भक्ति और शक्ति के जलवे को देखा।

पंजाब में सिख धर्म जो काम कर रहा था, वही दक्षिण में महाराष्ट्र में


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से शिक्षा लेकर धर्म के लिए सर्वस्व बलिदान करने की प्रतिज्ञा की । जिस धर्मयज्ञ में गुरू तेग बहादुर ने स्वयं की बलि दी थी, उसमें उनके पुत्र गुरू गोविन्द सिंह ने अपने चारों पुत्रों की आहुति दे दी। दशम गुरू गोविन्द सिंह ने एक हाथ में भक्ति का प्याला उठाया तो दूसरे हाथ में जाति रक्षा के लिए तलवार धारण की । संसार ने गुरू जी की भक्ति और शक्ति के जलवे को देखा।

पंजाब में सिख धर्म जो काम कर रहा था, वही दक्षिण में महाराष्ट्र में


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