हो रहा था। महाराष्ट्र की यह धती स्वामी दयानन्द की जन्मभूमि गुजरात से अधिक दूर नहीं है। पंजाब में धर्मसुधार का जो कार्य गुरू नानक ने किया वही काम महाराष्ट्र के तुकाराम, एकनाथ, नामदेव, ज्ञानेश्वर आदि सन्तों ने किया। छूतछात के भूत को भगा कर इन सन्तों ने सच्ची ईश्वरभक्ति का पाठ पढ़ाया। गुरू गोविन्द सिंह ने तो अपने धर्मात्मा पिता के शव को छूकर शपथ ली थी कि जिन लोगों ने मेरे पिता को मारा है, उनसे मैं बदला अवश्य लूंगा। केवल बदला
हो रहा था। महाराष्ट्र की यह धती स्वामी दयानन्द की जन्मभूमि गुजरात से अधिक दूर नहीं है। पंजाब में धर्मसुधार का जो कार्य गुरू नानक ने किया वही काम महाराष्ट्र के तुकाराम, एकनाथ, नामदेव, ज्ञानेश्वर आदि सन्तों ने किया। छूतछात के भूत को भगा कर इन सन्तों ने सच्ची ईश्वरभक्ति का पाठ पढ़ाया। गुरू गोविन्द सिंह ने तो अपने धर्मात्मा पिता के शव को छूकर शपथ ली थी कि जिन लोगों ने मेरे पिता को मारा है, उनसे मैं बदला अवश्य लूंगा। केवल बदला