अभी स्थिर नहीं हुए थे और वाक्य-रचना भी प्रायः अटपटी रहती थी। छत्रपति शिवाजी के प्रस्तुत हिन्दी
6 छत्रपति शिवाजी
अनुवाद की भी यही स्थिति थी, किन्तू आज के पाठकों के समक्ष यह महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ सुसम्पादित रूप में जाये, इस तथ्य को ध्यान में रखकर सम्पादक ने इसके कुछ अंश का पुनर्लेखन किया है तो अवशिष्ट अध्यायों की भाषा का परिष्कार कर उसे अद्यतन गद्य के निकट लाने का प्रयास किया है। ऐतिहासिक दृष्टि से इस ग्रन्थ में क्या कुछ है,
अभी स्थिर नहीं हुए थे और वाक्य-रचना भी प्रायः अटपटी रहती थी। छत्रपति शिवाजी के प्रस्तुत हिन्दी
6 छत्रपति शिवाजी
अनुवाद की भी यही स्थिति थी, किन्तू आज के पाठकों के समक्ष यह महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ सुसम्पादित रूप में जाये, इस तथ्य को ध्यान में रखकर सम्पादक ने इसके कुछ अंश का पुनर्लेखन किया है तो अवशिष्ट अध्यायों की भाषा का परिष्कार कर उसे अद्यतन गद्य के निकट लाने का प्रयास किया है। ऐतिहासिक दृष्टि से इस ग्रन्थ में क्या कुछ है,