छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

के अनेक अग्रवालों ने अपने राज्य की दीवानगीरी तथा खजाने को संभालने के काम को त्याग कर अपने हाथों में तलवार उठाई थी। वे राजपूत सरदारों के साथ युद्वों में लड़े भी थे। महाराष्ट्र के ब्राह्यणों में वीरता आज तक पाई जाती है। क्षत्रिय ही वैश्यों का व्यवसाय धारण कर ’खत्री’ बन गये । इन खत्रियों ने महाराजा रणजीतसिंह के समय में जो वीरता दिखाई उसे लोग अभी तक नहीं भूले हैं। सीमान्त प्रदेश के अफगान इन खत्रियों की वीरता से पराजित हैं।


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के अनेक अग्रवालों ने अपने राज्य की दीवानगीरी तथा खजाने को संभालने के काम को त्याग कर अपने हाथों में तलवार उठाई थी। वे राजपूत सरदारों के साथ युद्वों में लड़े भी थे। महाराष्ट्र के ब्राह्यणों में वीरता आज तक पाई जाती है। क्षत्रिय ही वैश्यों का व्यवसाय धारण कर ’खत्री’ बन गये । इन खत्रियों ने महाराजा रणजीतसिंह के समय में जो वीरता दिखाई उसे लोग अभी तक नहीं भूले हैं। सीमान्त प्रदेश के अफगान इन खत्रियों की वीरता से पराजित हैं।


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