और मुसलमान दोनों के लिए युद्व का भय उपस्थित रहता था। उस समय खून की नदियां बह रही थीं। बडे़ बडे़ शहर विनाश के कगार पर खडे़ थे। धनी पल भर में कंगाल हो जाते और दरिद्रों को धनी बनाने में भी देर नहीं लगती थी। न मन्दिर सुरक्षित थे और न मस्जिदें।
ऐसी भीषण स्थिति में जन्म लेकर शिवाजी ने अपने सघन धर्मपे्रम का परिचय दिया और नारियों के सतीत्व की रक्षा की। न केवल अपना ही आचरण शुद्व रखा अपितु किसी भी व्यक्ति को नारी का अपमान करने
और मुसलमान दोनों के लिए युद्व का भय उपस्थित रहता था। उस समय खून की नदियां बह रही थीं। बडे़ बडे़ शहर विनाश के कगार पर खडे़ थे। धनी पल भर में कंगाल हो जाते और दरिद्रों को धनी बनाने में भी देर नहीं लगती थी। न मन्दिर सुरक्षित थे और न मस्जिदें।
ऐसी भीषण स्थिति में जन्म लेकर शिवाजी ने अपने सघन धर्मपे्रम का परिचय दिया और नारियों के सतीत्व की रक्षा की। न केवल अपना ही आचरण शुद्व रखा अपितु किसी भी व्यक्ति को नारी का अपमान करने