छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

का जो जीवनचरित लिखा गया है उसे पढ़ कर पाठकों को निश्चय हो जायेगा कि शिवाजी सचमुच महापुरूष थे। उनमें जैसी प्रबन्ध क्षमता थी वह अन्यत्र


विज्ञप्ति 29

दुलर्भ थी। वे संगठन का महत्त्व तथा संगठन के सिद्वांतों को भली भांति जानते थे। यदि वे आज के युग में होते तो बड़े से बड़े यूरोपीय विद्वानों और सेनापतियों को कुछ शिक्षा दे जाते। वे युद्व-विद्या के निपुण पण्डित थे। शत्रुओं को परास्त करने की तरकीबें उन्हें मालूम थी। वे परम धीर,


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का जो जीवनचरित लिखा गया है उसे पढ़ कर पाठकों को निश्चय हो जायेगा कि शिवाजी सचमुच महापुरूष थे। उनमें जैसी प्रबन्ध क्षमता थी वह अन्यत्र


विज्ञप्ति 29

दुलर्भ थी। वे संगठन का महत्त्व तथा संगठन के सिद्वांतों को भली भांति जानते थे। यदि वे आज के युग में होते तो बड़े से बड़े यूरोपीय विद्वानों और सेनापतियों को कुछ शिक्षा दे जाते। वे युद्व-विद्या के निपुण पण्डित थे। शत्रुओं को परास्त करने की तरकीबें उन्हें मालूम थी। वे परम धीर,


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