छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

बाद मालोजी भोंसले को स्वप्न में किसी खजाने का हाल मालूम हुआ और वह बड़े धनपति हो गये। सम्पत्ति के मिल जाने पर इनके वंश की प्रतिष्ठा और बढ़ गई और दरबार से भी 5000 का अधिकार मिल गया। अहमदनगर के दरबारियों ने बीच में पड़ कर मालोजी और यादवराज की फिर मित्रता करा दी और अन्त में शाह जी और जीजीबाई का विवाह हो गया।

कहते हैं कि मालोजी भोंसले भवानीदेवी के परमभक्त थे। एक बार देवी ने स्वप्न में मालोजी को दर्शन दिया और कहा कि तेरे वंश


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बाद मालोजी भोंसले को स्वप्न में किसी खजाने का हाल मालूम हुआ और वह बड़े धनपति हो गये। सम्पत्ति के मिल जाने पर इनके वंश की प्रतिष्ठा और बढ़ गई और दरबार से भी 5000 का अधिकार मिल गया। अहमदनगर के दरबारियों ने बीच में पड़ कर मालोजी और यादवराज की फिर मित्रता करा दी और अन्त में शाह जी और जीजीबाई का विवाह हो गया।

कहते हैं कि मालोजी भोंसले भवानीदेवी के परमभक्त थे। एक बार देवी ने स्वप्न में मालोजी को दर्शन दिया और कहा कि तेरे वंश


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