मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

गांव, अता-पता कोई विशेष कार्यøम न लिखते हुए अंदमान के अंधेरे फलक पर आशाओं की दो-तीन तूलिकाएं मारते हुए लिखा कि ‘यदि वहां के नियमानुसार मुझे अपना परिवार पांच-दस वर्षो के लिए ले जाने की अनुमति दी गई तो मैं अपनी जीवन साधना में व्यतीत करूंगा और यदि मैं पुनः हिंदुस्थान की पावन धरती के तट पर अपना पैर नहीं रख सका, तो ततः प्राचेतसः शिष्यौं रामायणमितस्ततः मैथिलेयौ कुशलवौ जगतुर्गुरूचोदितौ की तरह ही, उन अभिनव कुमारों


के कंठांे


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गांव, अता-पता कोई विशेष कार्यøम न लिखते हुए अंदमान के अंधेरे फलक पर आशाओं की दो-तीन तूलिकाएं मारते हुए लिखा कि ‘यदि वहां के नियमानुसार मुझे अपना परिवार पांच-दस वर्षो के लिए ले जाने की अनुमति दी गई तो मैं अपनी जीवन साधना में व्यतीत करूंगा और यदि मैं पुनः हिंदुस्थान की पावन धरती के तट पर अपना पैर नहीं रख सका, तो ततः प्राचेतसः शिष्यौं रामायणमितस्ततः मैथिलेयौ कुशलवौ जगतुर्गुरूचोदितौ की तरह ही, उन अभिनव कुमारों


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