मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

तथा प्रेमयुक्त आग्रह विख्यात प्रकाशन मंडलियों से लेकर पाठशाला के बच्चों तक, सभी ओर से हमें अभी भी लगातार होते रहते हैं। इस कारण ऐसे आग्रह का अब सम्मान न करना एक तरफ से विनय का अतिरेक करके सार्वजनिक मनो भंग करना होगा, ऐसा हमें लगने लगा है। ऐसी स्थिति में जो कुछ बतलाया जा सके, वह हमारा अंदमान का वृत्तांत है- यह कह देने का निश्चय हमने किया है। सुसंगत वृत्तांत-कथन असंभव है, यह तो जाहिर है। अतः जो कुछ संक्षिप्त, टूटे-फूटे तथा संबंधविहिन संस्मरण हम बता सकेंगे,


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तथा प्रेमयुक्त आग्रह विख्यात प्रकाशन मंडलियों से लेकर पाठशाला के बच्चों तक, सभी ओर से हमें अभी भी लगातार होते रहते हैं। इस कारण ऐसे आग्रह का अब सम्मान न करना एक तरफ से विनय का अतिरेक करके सार्वजनिक मनो भंग करना होगा, ऐसा हमें लगने लगा है। ऐसी स्थिति में जो कुछ बतलाया जा सके, वह हमारा अंदमान का वृत्तांत है- यह कह देने का निश्चय हमने किया है। सुसंगत वृत्तांत-कथन असंभव है, यह तो जाहिर है। अतः जो कुछ संक्षिप्त, टूटे-फूटे तथा संबंधविहिन संस्मरण हम बता सकेंगे,


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