थी और प्रियजनों के पास अपने सुख-दुःखों को खुले मन से कह से कह डालने की प्रवृत्तिा गत तथा जिस संकटों के पराभव की कहानी बतलाने का आनंद अनुभव करने के लिए अत्यंत उत्सुक होने पर भी परिस्थिति पुनः-पुनः मार्ग अवरूद्व कर देती थी।
तथापि, जो कुछ भी आधा-अधूरा अथवा अल्प-स्वल्प सद्यःकालीन परिस्थिति की परिधि में बतलाने लायक होगा, उसे तो आपको कह देना ही होगा, हमें वह भी सुनने लायक लगने वाला है, इस प्रकार का अत्यंत उत्सुक, निश्पाप
थी और प्रियजनों के पास अपने सुख-दुःखों को खुले मन से कह से कह डालने की प्रवृत्तिा गत तथा जिस संकटों के पराभव की कहानी बतलाने का आनंद अनुभव करने के लिए अत्यंत उत्सुक होने पर भी परिस्थिति पुनः-पुनः मार्ग अवरूद्व कर देती थी।
तथापि, जो कुछ भी आधा-अधूरा अथवा अल्प-स्वल्प सद्यःकालीन परिस्थिति की परिधि में बतलाने लायक होगा, उसे तो आपको कह देना ही होगा, हमें वह भी सुनने लायक लगने वाला है, इस प्रकार का अत्यंत उत्सुक, निश्पाप