मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

मुझसे बात करने का प्रयास करता। मेरे विचार से मेरे लिए उसके मन में सम्मिश्र भावना थी, भले ही वह सत्य थी या मिथ्या। मेरे प्रति वह दया भाव प्रदर्शित करता था। भोजन यथासंभव ठीक-ठीक देने का प्रयास करते देखकर भी अनदेखी कर लेता, परंतु नियमपूर्वक राजनीतिक चर्चा करके मेरे मन पर यह प्रभाव जमाने का प्रयत्न करता कि मैंने अत्यंत निरर्थक एवं पागलपन का काम करके नादानीपूर्वक जीवनहानि की है। आते-जाते बंदियों को सकारण बुलाकर मुझे दिखाता और उनसे कहता,


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मुझसे बात करने का प्रयास करता। मेरे विचार से मेरे लिए उसके मन में सम्मिश्र भावना थी, भले ही वह सत्य थी या मिथ्या। मेरे प्रति वह दया भाव प्रदर्शित करता था। भोजन यथासंभव ठीक-ठीक देने का प्रयास करते देखकर भी अनदेखी कर लेता, परंतु नियमपूर्वक राजनीतिक चर्चा करके मेरे मन पर यह प्रभाव जमाने का प्रयत्न करता कि मैंने अत्यंत निरर्थक एवं पागलपन का काम करके नादानीपूर्वक जीवनहानि की है। आते-जाते बंदियों को सकारण बुलाकर मुझे दिखाता और उनसे कहता,


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