‘ छिह, तुम्हें वे क्योंकर छोडे़गे, आपकों यों ही सड़ने देंगे, मरने के पश्चात् ही छोड़ेंगे’।
कांटों का मुकुट
मैं पुनः-पुनः मन-ही-मन ‘प्रतिप्रसवहेयाः सूक्ष्माः’¹ - यह योगसूत्र बोलते हुए अपने मन को सिखाता िकइस कारावास में तुम्हें मानसिक यातना भी उसी तरह सहनी होगी जैसे शारीरिक यातनाएं। इससे यदि तुम्हारा तेजाभंग होता है तो यह माना जाएगा कि तुम्हारा तेज एक क्षणिक उत्तोजना ही थी। तुम ऐसा क्यों नहीं सोचते कि उन्हें इस खेल में
‘ छिह, तुम्हें वे क्योंकर छोडे़गे, आपकों यों ही सड़ने देंगे, मरने के पश्चात् ही छोड़ेंगे’।
कांटों का मुकुट
मैं पुनः-पुनः मन-ही-मन ‘प्रतिप्रसवहेयाः सूक्ष्माः’¹ - यह योगसूत्र बोलते हुए अपने मन को सिखाता िकइस कारावास में तुम्हें मानसिक यातना भी उसी तरह सहनी होगी जैसे शारीरिक यातनाएं। इससे यदि तुम्हारा तेजाभंग होता है तो यह माना जाएगा कि तुम्हारा तेज एक क्षणिक उत्तोजना ही थी। तुम ऐसा क्यों नहीं सोचते कि उन्हें इस खेल में