दीवानगी है दीवानगी राव!’ मैं यह सब शांति से सुन लेता, परंतु कभी-कभी वह मेरे धैर्य का बांध भी तोड़ डालता। हाथ जोड़कर मुझसे कहता, ’महाशय, बताइए, सच-सच बोलिए-शासन की बागडोर आप कैसे हथियाएंगे? आपको क्या लगता है, कितने दिनों में आप छूटेंगे? इस दिसंबर में दरबार है (यह उस समय की बात है जब जाॅर्ज पंचम गद्दी पर बैठनेवाले थे) तब छूटेंगे? ‘मैं कहता, न-न, भई, हमारे लिए जुबली कैसी? तथापि कभी दस-बारह वर्षों में समय बदला तो बदला। ’ तो वह अत्यंत कड़वा मुंह बनाकर कहता,
दीवानगी है दीवानगी राव!’ मैं यह सब शांति से सुन लेता, परंतु कभी-कभी वह मेरे धैर्य का बांध भी तोड़ डालता। हाथ जोड़कर मुझसे कहता, ’महाशय, बताइए, सच-सच बोलिए-शासन की बागडोर आप कैसे हथियाएंगे? आपको क्या लगता है, कितने दिनों में आप छूटेंगे? इस दिसंबर में दरबार है (यह उस समय की बात है जब जाॅर्ज पंचम गद्दी पर बैठनेवाले थे) तब छूटेंगे? ‘मैं कहता, न-न, भई, हमारे लिए जुबली कैसी? तथापि कभी दस-बारह वर्षों में समय बदला तो बदला। ’ तो वह अत्यंत कड़वा मुंह बनाकर कहता,