इस तरह विवके के साथ मैं उस व्यक्ति का व्यवहार सहता रहा। आज सोलह वर्ष बीत चुके थे, पंरतु अभी तक मैं
निश्चित रूप में यह नहीं कह सकता कि उस मनुष्य को जैसे कि कुछ बंदियों का कहना था- मुझे मानसिक यातनाएं दिलाकर मेरा तेजाभंग करने के लिए ही हेतुपूर्वक नियुक्त किया गया था अथवा उसका उस तरह का व्यवहार मात्र सहानुभूतिपूर्ण वाहियातपन था। कुछ भी हो, उसका वह गीत आज भी मेरे कानों में गूंज रहा है,‘ अजब तेरी कुदरत अजब तेरा खेल, मकड़ी
इस तरह विवके के साथ मैं उस व्यक्ति का व्यवहार सहता रहा। आज सोलह वर्ष बीत चुके थे, पंरतु अभी तक मैं
निश्चित रूप में यह नहीं कह सकता कि उस मनुष्य को जैसे कि कुछ बंदियों का कहना था- मुझे मानसिक यातनाएं दिलाकर मेरा तेजाभंग करने के लिए ही हेतुपूर्वक नियुक्त किया गया था अथवा उसका उस तरह का व्यवहार मात्र सहानुभूतिपूर्ण वाहियातपन था। कुछ भी हो, उसका वह गीत आज भी मेरे कानों में गूंज रहा है,‘ अजब तेरी कुदरत अजब तेरा खेल, मकड़ी