मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



उपनेत्रों की नीलामी

उस समय मेरे पास मेरी अपनी केवल दो चीजें थी- एक मेरे उपनेत्र (ऐनक) और दूसरी एक आने की छोटी सी अंगुलाकार गीता। ये दो वस्तुएं ही मेरी संपत्तिा थी। पंरतु आज सवेरे हवलदार ने इन दो वस्तुओं की भी मांग की,‘‘साहब मांगता है।’’ मेरी


समझ में नहीं आ रहा था कि उपनेत्र की मांग क्यों? थोड़ी देर बाद सुपरिटेंडेंट आया। मैंने पूछा,‘‘उपनेत्र क्यों लिए गए?’’ उसने बताया, ‘‘राज्यक्रांति के अपराण में तुम्हारी सारी चीजें जब्त¹ की जाएं,


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उपनेत्रों की नीलामी

उस समय मेरे पास मेरी अपनी केवल दो चीजें थी- एक मेरे उपनेत्र (ऐनक) और दूसरी एक आने की छोटी सी अंगुलाकार गीता। ये दो वस्तुएं ही मेरी संपत्तिा थी। पंरतु आज सवेरे हवलदार ने इन दो वस्तुओं की भी मांग की,‘‘साहब मांगता है।’’ मेरी


समझ में नहीं आ रहा था कि उपनेत्र की मांग क्यों? थोड़ी देर बाद सुपरिटेंडेंट आया। मैंने पूछा,‘‘उपनेत्र क्यों लिए गए?’’ उसने बताया, ‘‘राज्यक्रांति के अपराण में तुम्हारी सारी चीजें जब्त¹ की जाएं,


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