मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

‘‘ क्यों महाराज, मद्रास में आपका कोई स्नेही रहता है!’’

‘‘इस बंदीशाला में रहकर भला मैं कैसे जान सकता हूं कि कौन कहां है और थोड़ी देर पहले आप ही ने तो कहा था कि जो कोई हैं वे बुरके में बैठे हैं। कहने भर के लिए भी वे चूं तक नहीं करते हुए कहा ‘‘अर्क हैं अर्क, अवतारी हैं ये। ‘‘इसका निश्चित अर्थ आज तक मैं नहीं जान सका। हो सकता है, उसे संदेह हुआ हो कि मद्रास की जो वार्त्ता उसने सुनी, वह मैंने भी सुनी होगी और मेरे उत्तर का व्यंग्य उसने समझा हो।


121 of 2228

‘‘ क्यों महाराज, मद्रास में आपका कोई स्नेही रहता है!’’

‘‘इस बंदीशाला में रहकर भला मैं कैसे जान सकता हूं कि कौन कहां है और थोड़ी देर पहले आप ही ने तो कहा था कि जो कोई हैं वे बुरके में बैठे हैं। कहने भर के लिए भी वे चूं तक नहीं करते हुए कहा ‘‘अर्क हैं अर्क, अवतारी हैं ये। ‘‘इसका निश्चित अर्थ आज तक मैं नहीं जान सका। हो सकता है, उसे संदेह हुआ हो कि मद्रास की जो वार्त्ता उसने सुनी, वह मैंने भी सुनी होगी और मेरे उत्तर का व्यंग्य उसने समझा हो।


121 of 2228