मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

ऊंचे स्वर में बात करते-करते किसी विजयी वीर की तरह घूम रहा है। सिपाही कहते हैं, दो बार कालेपानी की हवा खाकर आया है और अब आजीवन कालेपानी पर जा रहा है। वह स्वयं यह शेखी बघार रहा है कि वह कालेपानी पर जमादारी कर चुका है, वहां उसने अपनी ऐसी धाक जमाई है कि एक बंदीवान लौंडे को उसकी अनुमति के बिना उसके एक शत्रु से बतियाते देखकर डंडे के एक ही वार से उसका सिर फोड़कर नीचे गिरा दिया। दूसरे दिन वह मर ही गया। परंतु इस दुष्ट ने यह रिपोर्ट


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ऊंचे स्वर में बात करते-करते किसी विजयी वीर की तरह घूम रहा है। सिपाही कहते हैं, दो बार कालेपानी की हवा खाकर आया है और अब आजीवन कालेपानी पर जा रहा है। वह स्वयं यह शेखी बघार रहा है कि वह कालेपानी पर जमादारी कर चुका है, वहां उसने अपनी ऐसी धाक जमाई है कि एक बंदीवान लौंडे को उसकी अनुमति के बिना उसके एक शत्रु से बतियाते देखकर डंडे के एक ही वार से उसका सिर फोड़कर नीचे गिरा दिया। दूसरे दिन वह मर ही गया। परंतु इस दुष्ट ने यह रिपोर्ट


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