देकर अपने हाथ झाड़ लिऐ कि वह लड़का काम करते समय किसी कगार से गिर पड़ा। कालेपानी पर मेरी जमादारी पक्की है-वहां तो बस जाने भर की देरी है- मैं जमादार बना। फलाने साहब, अमुक साहब, इस प्रकार बड़े-बड़े नाम लेकर उसने नवागत बंदियों को चकित कर दिया। उनमें से जो कुछ कम आयु के थे और जिनकी छाती में अभी तक ह्नदय नामक कोई चीज धड़क रही थी और कालेपानी जैसे दंड से लज्जित थे, इसी तरह कुछ अन्य बंदी, जिन्हें इस बात की चिंता थी कि आगे कैसी कटेगी,
देकर अपने हाथ झाड़ लिऐ कि वह लड़का काम करते समय किसी कगार से गिर पड़ा। कालेपानी पर मेरी जमादारी पक्की है-वहां तो बस जाने भर की देरी है- मैं जमादार बना। फलाने साहब, अमुक साहब, इस प्रकार बड़े-बड़े नाम लेकर उसने नवागत बंदियों को चकित कर दिया। उनमें से जो कुछ कम आयु के थे और जिनकी छाती में अभी तक ह्नदय नामक कोई चीज धड़क रही थी और कालेपानी जैसे दंड से लज्जित थे, इसी तरह कुछ अन्य बंदी, जिन्हें इस बात की चिंता थी कि आगे कैसी कटेगी,