धूम-धड़ाके में कभी-कभी ये पनडुब्बियां किसी तटीय शहर में आकर विश्राम
करतीं, तब उतने से अल्प काल में भोग-विलास के लिए जो विहारालय बनाए गए थे, उनमें से कई में यह ध्येय वाक्य होता-‘एन्जाॅय टिल दाउ गोएस्ट मैड! एन्जाॅय फाॅर टुमारों वी डाय!!’ (हंसो बेटा, इतना हंसो कि उन्माद हो जाए, क्यांेकि कल तुम्हें कराल काल का ग्रास जो बनना है!) इस तरह के क्रीड़ालयों में उन्मुक्त हास्य-हुल्लड़ सभ्यता सभी नियमित बंधनों को पैरों तले कुचलकर
धूम-धड़ाके में कभी-कभी ये पनडुब्बियां किसी तटीय शहर में आकर विश्राम
करतीं, तब उतने से अल्प काल में भोग-विलास के लिए जो विहारालय बनाए गए थे, उनमें से कई में यह ध्येय वाक्य होता-‘एन्जाॅय टिल दाउ गोएस्ट मैड! एन्जाॅय फाॅर टुमारों वी डाय!!’ (हंसो बेटा, इतना हंसो कि उन्माद हो जाए, क्यांेकि कल तुम्हें कराल काल का ग्रास जो बनना है!) इस तरह के क्रीड़ालयों में उन्मुक्त हास्य-हुल्लड़ सभ्यता सभी नियमित बंधनों को पैरों तले कुचलकर