वे भी खचाखच भरे रहते थे और मधुशालाएं, क्रीड़ालय सतत नाच-गानांे, हंसी-कहकहों से गूंजते रहते थे।
उन्मुक्त हास्य
पिछले महायुद्व में भी यही अनुभव हुआ। जर्मन पनडुब्बियों के अधिकारियों तथा नाविकों को युद्व में सभी सैनिकों से अधिक कष्टप्रद तथा मारक सेवा करनी पड़ी। उन्हें तत्काल अपने प्राण हथेली पर लेकर सागर में गोते लगाने पड़ते और समुद्र के गर्भ में पल-पल मृत्यु की अपेक्षा करते मारने का काम करना पड़ता। उस भयप्रद अनिश्चित के
वे भी खचाखच भरे रहते थे और मधुशालाएं, क्रीड़ालय सतत नाच-गानांे, हंसी-कहकहों से गूंजते रहते थे।
उन्मुक्त हास्य
पिछले महायुद्व में भी यही अनुभव हुआ। जर्मन पनडुब्बियों के अधिकारियों तथा नाविकों को युद्व में सभी सैनिकों से अधिक कष्टप्रद तथा मारक सेवा करनी पड़ी। उन्हें तत्काल अपने प्राण हथेली पर लेकर सागर में गोते लगाने पड़ते और समुद्र के गर्भ में पल-पल मृत्यु की अपेक्षा करते मारने का काम करना पड़ता। उस भयप्रद अनिश्चित के