क्रोध में लाल-पीला होकर कुढ़ते रहने वाले और दुःख से हिचकियां भर-भरकर रोनेवाले सैकड़ों जीव कराहते हुए ही सही, जोर-जोर से ठहाके लगा रहे थे। तीव्र संकट के मनोरंजनार्थ साधारण विनोद पर्याप्त न होने से बीभत्स विनोद रूपी दारू की बोतलें गटकते हुए वे नशे मंे झूम-झूमकर चल रहे थे। कोई सिंध का, कोई धारवाड़ का, कोई कोंकण का, कोई गुजरात का निवासी। उनकी विभिन्न भाषाएं भले ही उनके मनोविचार तथा मनोविकार को पूरी तरह अभिव्यक्त करने मंे रहने
क्रोध में लाल-पीला होकर कुढ़ते रहने वाले और दुःख से हिचकियां भर-भरकर रोनेवाले सैकड़ों जीव कराहते हुए ही सही, जोर-जोर से ठहाके लगा रहे थे। तीव्र संकट के मनोरंजनार्थ साधारण विनोद पर्याप्त न होने से बीभत्स विनोद रूपी दारू की बोतलें गटकते हुए वे नशे मंे झूम-झूमकर चल रहे थे। कोई सिंध का, कोई धारवाड़ का, कोई कोंकण का, कोई गुजरात का निवासी। उनकी विभिन्न भाषाएं भले ही उनके मनोविचार तथा मनोविकार को पूरी तरह अभिव्यक्त करने मंे रहने