मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

मजिस्ट्रेट, कोर्ट, सेशन, ज्यूरी, हाईकोर्ट आदि कई परीक्षाओं में खरा उतरा अथवा चढ़ा मनुष्य ही आजन्म कारावास, कालेपानी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर पाता है। तिसपर भी चुन-चुनकर जो विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि रूपी बदमाश यहां आए थे, उन बदमाशों की यह प्रमुख संस्था थी। उसका पूर्वापर लौकिक रूप ऐसा था कि थाने में चालान का आगमन होते ही सिपाही, हवलदार, जेलर, सुपरिटेंडेंट सभी चिंतामग्न होने चाहिए, दीवारें टूटनी चाहिए, सीखचें उखड़ने चाहिए,


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मजिस्ट्रेट, कोर्ट, सेशन, ज्यूरी, हाईकोर्ट आदि कई परीक्षाओं में खरा उतरा अथवा चढ़ा मनुष्य ही आजन्म कारावास, कालेपानी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर पाता है। तिसपर भी चुन-चुनकर जो विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि रूपी बदमाश यहां आए थे, उन बदमाशों की यह प्रमुख संस्था थी। उसका पूर्वापर लौकिक रूप ऐसा था कि थाने में चालान का आगमन होते ही सिपाही, हवलदार, जेलर, सुपरिटेंडेंट सभी चिंतामग्न होने चाहिए, दीवारें टूटनी चाहिए, सीखचें उखड़ने चाहिए,


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