कहते ही आदरमिश्रित आश्चर्य भाव से भृकुटियां तानकर उनके मुख से भी ‘अच्छा!’ निकल ही जाता है। इसका कारण भ्ज्ञी स्पष्ट है। चोरी, उचक्की, डाकेजनी, न्यायलय तथा कारागृह में उनका सारा जन्म व्यतीत होता है। उधर उनके मतानुसार सहज ही ‘बालिस्टर’ कर्तुमकर्तुमन्यथाकर्तुम् समर्थ एक अद्वितीय प्राणी प्रतीत होगा ही, क्यांेकि वह उनके अत्यंत कुशलतापूर्वक बुने हुए पापों के जाल अपनी कुशाग्र बुद्वि द्वारा छिन्न-विछिन्न करता है अथवा इसके विपरीत
कहते ही आदरमिश्रित आश्चर्य भाव से भृकुटियां तानकर उनके मुख से भी ‘अच्छा!’ निकल ही जाता है। इसका कारण भ्ज्ञी स्पष्ट है। चोरी, उचक्की, डाकेजनी, न्यायलय तथा कारागृह में उनका सारा जन्म व्यतीत होता है। उधर उनके मतानुसार सहज ही ‘बालिस्टर’ कर्तुमकर्तुमन्यथाकर्तुम् समर्थ एक अद्वितीय प्राणी प्रतीत होगा ही, क्यांेकि वह उनके अत्यंत कुशलतापूर्वक बुने हुए पापों के जाल अपनी कुशाग्र बुद्वि द्वारा छिन्न-विछिन्न करता है अथवा इसके विपरीत