उस रात मेरी भी अवस्था कुछ ऐसी ही हो जाती, परंतु सौभाग्यवश ‘बैरिस्टर’ और ‘बड़ा साहब’ के रूप में जिसे-तिस के मुंह में अपना बोलबाला था। बंदियों में और उनमें भी घुटे हुए बदमाश अपराधियों में, यदि किसी वर्ग के विषय में सहज आदरभाव तथा भय उत्पन्न होता है, तो वह ‘बैरिस्टर’ वर्ग के विषय में है। कवि, विद्वान, सात्तिवक जनों के संबंध में उनकी कोई विशेष भावना नहीं होती, भले ही वह अंगे्रजों का प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। परंतु ‘बैरिस्टर’
उस रात मेरी भी अवस्था कुछ ऐसी ही हो जाती, परंतु सौभाग्यवश ‘बैरिस्टर’ और ‘बड़ा साहब’ के रूप में जिसे-तिस के मुंह में अपना बोलबाला था। बंदियों में और उनमें भी घुटे हुए बदमाश अपराधियों में, यदि किसी वर्ग के विषय में सहज आदरभाव तथा भय उत्पन्न होता है, तो वह ‘बैरिस्टर’ वर्ग के विषय में है। कवि, विद्वान, सात्तिवक जनों के संबंध में उनकी कोई विशेष भावना नहीं होती, भले ही वह अंगे्रजों का प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। परंतु ‘बैरिस्टर’