भी करता रहा। भले ही व्यक्तिगत दुःख से मन व्याकुल हो, तथापि उस गड़बड़झाले में मन अपना
दुःख-दर्द भूलकर घड़ी भर के लिए वह तमाशा देखे बिना अन्य कुछ कर भी नहीं सकता, इतना उन लोगों के ठहाकों का शोर हो रहा था। मंैने उसमें प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं लिया तथा चालान ने यह कहते हुए उसकी अपेक्षा की कि ‘बालिस्टर साहब को तंग मत करो।’ इतना ही नहीं,ग्यारह बजे रात को जब उनका हंगामा शिखर पर पहुंच गया तब सिपाहियों ने उनसे कहा,‘‘साब को नींद नहीं आ रही है,
भी करता रहा। भले ही व्यक्तिगत दुःख से मन व्याकुल हो, तथापि उस गड़बड़झाले में मन अपना
दुःख-दर्द भूलकर घड़ी भर के लिए वह तमाशा देखे बिना अन्य कुछ कर भी नहीं सकता, इतना उन लोगों के ठहाकों का शोर हो रहा था। मंैने उसमें प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं लिया तथा चालान ने यह कहते हुए उसकी अपेक्षा की कि ‘बालिस्टर साहब को तंग मत करो।’ इतना ही नहीं,ग्यारह बजे रात को जब उनका हंगामा शिखर पर पहुंच गया तब सिपाहियों ने उनसे कहा,‘‘साब को नींद नहीं आ रही है,