भरे होने के कारण हमारा मन कठोर हो गया है। यदि आप भी मेरी स्थिति में होते तो इसी विवेक के बल पर ऐसा ही धीरज रख पाते। आपकी सहायता के प्रति मैं आभारी हूं।’’
इतने में ही किसी के आने की आहट हुई। वह सज्जन झट से मेरी कोठरी के आगे से निकल दूसरी दिशा की ओर अपने काम से चलते बने। मैं अपनी कोठरी में पीछे सरककर खड़ा रहा। मन में श्शब्द गूंज रहे थे-’पचास वर्ष’।
तभी वे लोग आ गए, जिनके आने की आवाज आई थी। अधिकारी ने द्वार खोलकर मुझे
भरे होने के कारण हमारा मन कठोर हो गया है। यदि आप भी मेरी स्थिति में होते तो इसी विवेक के बल पर ऐसा ही धीरज रख पाते। आपकी सहायता के प्रति मैं आभारी हूं।’’
इतने में ही किसी के आने की आहट हुई। वह सज्जन झट से मेरी कोठरी के आगे से निकल दूसरी दिशा की ओर अपने काम से चलते बने। मैं अपनी कोठरी में पीछे सरककर खड़ा रहा। मन में श्शब्द गूंज रहे थे-’पचास वर्ष’।
तभी वे लोग आ गए, जिनके आने की आवाज आई थी। अधिकारी ने द्वार खोलकर मुझे