भोजन परोसवाया। हेग का निर्णय आने तक मुझे बंदियों का भोजन या वेश नहीं दिया गया था; क्योंकि कदाचित् तब तक सरकारी आदेश नहीं आया होगा।
भोजन करते समय मैंने हेतुपूर्वक ही अच्छे पदार्थ नहीं खाए तो आधिकारी ने पूछा, ’’क्यों, राव साहब, आज खाते क्यों नहीं?’’
’’खा तो रहा हूं, परंतु वही व्यंजन खा रहा हूं जो सभी बंदियों को मिलते हैं।
कौन जाने, कल उन्हीं बंदियों के साथ मुझे भी काम करने जाना पड़े, कहा नहीं जा सकता। सदन्न कभी मिलेगा,
भोजन परोसवाया। हेग का निर्णय आने तक मुझे बंदियों का भोजन या वेश नहीं दिया गया था; क्योंकि कदाचित् तब तक सरकारी आदेश नहीं आया होगा।
भोजन करते समय मैंने हेतुपूर्वक ही अच्छे पदार्थ नहीं खाए तो आधिकारी ने पूछा, ’’क्यों, राव साहब, आज खाते क्यों नहीं?’’
’’खा तो रहा हूं, परंतु वही व्यंजन खा रहा हूं जो सभी बंदियों को मिलते हैं।
कौन जाने, कल उन्हीं बंदियों के साथ मुझे भी काम करने जाना पड़े, कहा नहीं जा सकता। सदन्न कभी मिलेगा,