मेरे डिब्बे की खिड़कियां खोल दी गई। काफी गोरे लोग थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खड़े थे। मैंने देखा, उनमें से कुछ लोगों ने उत्सुकता के आवेश में अपनी मेमों को कंधों पर उठाया हुआ था। एक ने मुझे संकेत किया, खिड़की के पास खड़े रहो। मैं खड़ा रहा तो ‘ज्ीमतमश्े ीमए जींज पे ैंअंतांत’ का हल्ला सुनाई दिया। ये गोरे लोग भी, जिन्होंने मुझे देखने के लिए वहां भीड़ लगाई थी, इतना निकट नहीं आ पाए कि मुझसे दो बातें करें। चार-पंाच गोरे आकर चले गए, परंतु मैंने
मेरे डिब्बे की खिड़कियां खोल दी गई। काफी गोरे लोग थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खड़े थे। मैंने देखा, उनमें से कुछ लोगों ने उत्सुकता के आवेश में अपनी मेमों को कंधों पर उठाया हुआ था। एक ने मुझे संकेत किया, खिड़की के पास खड़े रहो। मैं खड़ा रहा तो ‘ज्ीमतमश्े ीमए जींज पे ैंअंतांत’ का हल्ला सुनाई दिया। ये गोरे लोग भी, जिन्होंने मुझे देखने के लिए वहां भीड़ लगाई थी, इतना निकट नहीं आ पाए कि मुझसे दो बातें करें। चार-पंाच गोरे आकर चले गए, परंतु मैंने