मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

गए। मार्सेलिस की लंबी-चैड़ी गप्पें सूनने के कारण उनकी यही धारणा बनी थी कि इस यात्रा मंे भी मैं उन्हें बहुत तंग करूंगा। अंगे्रज को देखते ही मेरे तन-बदन में आग लग जाती है। मैं कोई उद्दंड, अशिष्ट तथा भयंकर व्यक्ति हूं। परंतु इस यात्रा में उन्हें जरा भी कष्ट न हुआ और मुझे अंत में मद्रास के अधिकारियों को सौंपने के पश्चात् जैसे उनका मन शांत हुआ और उन्हें मुझमें इतने सद्गुण दिखाई दिए कि उन्होंने टोपी उतारकर मुझे प्रणाम भी किया।


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गए। मार्सेलिस की लंबी-चैड़ी गप्पें सूनने के कारण उनकी यही धारणा बनी थी कि इस यात्रा मंे भी मैं उन्हें बहुत तंग करूंगा। अंगे्रज को देखते ही मेरे तन-बदन में आग लग जाती है। मैं कोई उद्दंड, अशिष्ट तथा भयंकर व्यक्ति हूं। परंतु इस यात्रा में उन्हें जरा भी कष्ट न हुआ और मुझे अंत में मद्रास के अधिकारियों को सौंपने के पश्चात् जैसे उनका मन शांत हुआ और उन्हें मुझमें इतने सद्गुण दिखाई दिए कि उन्होंने टोपी उतारकर मुझे प्रणाम भी किया।


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