आभारी हूं। परंतु हमारे घाव इतने हरे हैं कि इतने शीघ्र कैसे भरेंगे? इस तरह की आशा पर निर्भर रहना मूर्खता ही होगी।’’ उन्होंने इतने आश्वस्त स्वर में कहा, जैसे कि वह जताना चाहते थे कि अधिकारी होने के नाते वे कुछ विशेष जानते हैं, ‘‘मुझपर विश्वास रखो। आप अवश्य मुक्त होंगे। अच्छा, आपसे विदा लेता हूं। आपके धीरोदात्त आचरण की अमिट छाप (ज्ीपे लवनत कपहदपपिमक बवनतंहम) मेरे मन पर अंकित हो गई है।’’ अन्य अधिकारी भी विदा लेते हुए चले
आभारी हूं। परंतु हमारे घाव इतने हरे हैं कि इतने शीघ्र कैसे भरेंगे? इस तरह की आशा पर निर्भर रहना मूर्खता ही होगी।’’ उन्होंने इतने आश्वस्त स्वर में कहा, जैसे कि वह जताना चाहते थे कि अधिकारी होने के नाते वे कुछ विशेष जानते हैं, ‘‘मुझपर विश्वास रखो। आप अवश्य मुक्त होंगे। अच्छा, आपसे विदा लेता हूं। आपके धीरोदात्त आचरण की अमिट छाप (ज्ीपे लवनत कपहदपपिमक बवनतंहम) मेरे मन पर अंकित हो गई है।’’ अन्य अधिकारी भी विदा लेते हुए चले