सुपरिटेंडेट आया और नियमानुसार परंतु सहानुभूति शब्दों में मुझसे बोला,’’आगे से आपको बंदी के कपड़े तथा अन्न मिलेगा। आपका पचास वर्ष का दंड आज से लागू हो गया है।’’
मैं उठा, अपने घरेलू कपड़े उतार दिए, बंदी के कपड़े ले लिये और पहनने लगा। मन कांप गया। ये वस्त्र-बंदी के वस्त्र, जो आज श्शरीर पर चढ़ रहे हैं- अब फिर कभी उतरनेवाले नहीं है। इन्हीं कपड़ों में मेरी अरथी निकलेगी। धुंधले से विचार ं ं ं ं ं किंतू मन उदास सा हो गया। सुपरिटंेडंेट
सुपरिटेंडेट आया और नियमानुसार परंतु सहानुभूति शब्दों में मुझसे बोला,’’आगे से आपको बंदी के कपड़े तथा अन्न मिलेगा। आपका पचास वर्ष का दंड आज से लागू हो गया है।’’
मैं उठा, अपने घरेलू कपड़े उतार दिए, बंदी के कपड़े ले लिये और पहनने लगा। मन कांप गया। ये वस्त्र-बंदी के वस्त्र, जो आज श्शरीर पर चढ़ रहे हैं- अब फिर कभी उतरनेवाले नहीं है। इन्हीं कपड़ों में मेरी अरथी निकलेगी। धुंधले से विचार ं ं ं ं ं किंतू मन उदास सा हो गया। सुपरिटंेडंेट