जैसी मुर्दनी छा जाती। मनुष्य एक बार अरथी पर बांध लिया गया कि उसके परिजन समझते हैं कि यह इस संसार से सदा के लिए जा रहा है और भावना से दुःखित, विस्मित होकर शून्यवत् उसकी उस निकलती अरथी की ओर देखते रहते हैं- ठीक उसी दृष्टिकोण से वे मेरी ओर देख रहे थे। उनकी मुदा से यह भाव स्पष्ट परिलक्षित था कि मैं अब इस जगत् के लिए मर चुका- और यह भावना सत्य थी। सचमुच ही मुझे अरथी पर चढ़ाया जा रहा था। अंतर बस इतना ही था कि शव को अरथी पर चढ़ाते
जैसी मुर्दनी छा जाती। मनुष्य एक बार अरथी पर बांध लिया गया कि उसके परिजन समझते हैं कि यह इस संसार से सदा के लिए जा रहा है और भावना से दुःखित, विस्मित होकर शून्यवत् उसकी उस निकलती अरथी की ओर देखते रहते हैं- ठीक उसी दृष्टिकोण से वे मेरी ओर देख रहे थे। उनकी मुदा से यह भाव स्पष्ट परिलक्षित था कि मैं अब इस जगत् के लिए मर चुका- और यह भावना सत्य थी। सचमुच ही मुझे अरथी पर चढ़ाया जा रहा था। अंतर बस इतना ही था कि शव को अरथी पर चढ़ाते