हम किसी शव को अरथी पर चढ़ाते और ठीक तरह से बांधते हुए विस्मय और जिज्ञासापूर्वक देखते हैं।
उस ‘महाराजा’ जलयान पर किसी बंदी का, जिसे आजन्म कारावास हो गया है,
सवार होना और शव को अरथी पर सजाना एक ही बात थी। आज तक जो सैकड़ों-हजारों बंदी आजन्म कारावास की सजा काटने इस भयंकर जलयान पर चढ़कर कालेपानी गए, उनमें से दस भी जीवित वापस नहीं लौट सके। अठारह-बीस वर्ष की चढ़ती आयु के युवकों पर इस जलयान पर पैर रखते ही अस्सी वर्ष के बूढ़ों
हम किसी शव को अरथी पर चढ़ाते और ठीक तरह से बांधते हुए विस्मय और जिज्ञासापूर्वक देखते हैं।
उस ‘महाराजा’ जलयान पर किसी बंदी का, जिसे आजन्म कारावास हो गया है,
सवार होना और शव को अरथी पर सजाना एक ही बात थी। आज तक जो सैकड़ों-हजारों बंदी आजन्म कारावास की सजा काटने इस भयंकर जलयान पर चढ़कर कालेपानी गए, उनमें से दस भी जीवित वापस नहीं लौट सके। अठारह-बीस वर्ष की चढ़ती आयु के युवकों पर इस जलयान पर पैर रखते ही अस्सी वर्ष के बूढ़ों