जहाज के अधिकारी से लेकर सिपाही-संतरी तक और बंदियों से लेकर खलासियों तक मेरे बहाने सतत राजनीति की चर्चा छिड़ती। जिन्होंने यह सब कभी नहीं सुना था, उन्हांेने उसे सुना; जिन्हें कभी सूझा नहीं था, उन्हें सूझा और जिन्होंने इसे कभी नहीं माना था, उन्हांेने मान लिया।
बारी बाबा की कहानी
दूसरी महत्तवपूर्ण बात, जो वहां की परिस्थिति में मन को अपनी ओर खींचती, वह यह ज्ञात करना था कि कालापानी कैसा है। जो भी कोई वहां से आता, उससे यही
जहाज के अधिकारी से लेकर सिपाही-संतरी तक और बंदियों से लेकर खलासियों तक मेरे बहाने सतत राजनीति की चर्चा छिड़ती। जिन्होंने यह सब कभी नहीं सुना था, उन्हांेने उसे सुना; जिन्हें कभी सूझा नहीं था, उन्हें सूझा और जिन्होंने इसे कभी नहीं माना था, उन्हांेने मान लिया।
बारी बाबा की कहानी
दूसरी महत्तवपूर्ण बात, जो वहां की परिस्थिति में मन को अपनी ओर खींचती, वह यह ज्ञात करना था कि कालापानी कैसा है। जो भी कोई वहां से आता, उससे यही