पूछने को जी चाहता। प्रत्येक व्यक्ति एक ही बात पूछता। फिर मुझे भी पूछने की इच्छा होती। अंदमान के सिपाहियों की वह टोली, जो बंदियों को लेने आई थी, उससे पूछते क्योंकि वही इस विषय के प्रमुख अधिकारी और वही इसके ज्ञाता! कलेपानी का नाम लेते ही वे सबसे पहले ‘बारी बाबा’ की कहानी सुनाते।
उनकी धारणा थी कि बारी बाबा ही कालापानी है। उन दंडितों में से जो अत्यंत निर्दय बंदी होते, वे बिना किसी कारण हो-हल्ला करके आपस में गाली-गलौज करते,
पूछने को जी चाहता। प्रत्येक व्यक्ति एक ही बात पूछता। फिर मुझे भी पूछने की इच्छा होती। अंदमान के सिपाहियों की वह टोली, जो बंदियों को लेने आई थी, उससे पूछते क्योंकि वही इस विषय के प्रमुख अधिकारी और वही इसके ज्ञाता! कलेपानी का नाम लेते ही वे सबसे पहले ‘बारी बाबा’ की कहानी सुनाते।
उनकी धारणा थी कि बारी बाबा ही कालापानी है। उन दंडितों में से जो अत्यंत निर्दय बंदी होते, वे बिना किसी कारण हो-हल्ला करके आपस में गाली-गलौज करते,