मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

के बाद चला गया। सब लोग चले गए। मैं नीचे बैठा शेश रहे हम दोनों-मैं और मेरा दंड। अकेले उस उदास कोठरी में एक-दूसरे का सामना करते हुए, एक-दूसरे का मुंह देखते हुए।

इसके आगे उस दिन की कहानी तथा ह्नदय में मची खलबचली हमने ’सप्तर्शि¹


कविता के पूर्वार्ध में उसी पुस्तक में प्रकाशित की है।

दूसरा दिन

’’ पौ फट गई है।’’ जमादर ने आकर कहा,’’ यद्यपि आपकी सजा प्रारंभ हो गई है तथापि आपको पूर्व की भांति ही प्रातः व्यायाम के लिए सैर करने नीचे लाया जाए, साहब ने कहा है।’’


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के बाद चला गया। सब लोग चले गए। मैं नीचे बैठा शेश रहे हम दोनों-मैं और मेरा दंड। अकेले उस उदास कोठरी में एक-दूसरे का सामना करते हुए, एक-दूसरे का मुंह देखते हुए।

इसके आगे उस दिन की कहानी तथा ह्नदय में मची खलबचली हमने ’सप्तर्शि¹


कविता के पूर्वार्ध में उसी पुस्तक में प्रकाशित की है।

दूसरा दिन

’’ पौ फट गई है।’’ जमादर ने आकर कहा,’’ यद्यपि आपकी सजा प्रारंभ हो गई है तथापि आपको पूर्व की भांति ही प्रातः व्यायाम के लिए सैर करने नीचे लाया जाए, साहब ने कहा है।’’


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