सभी दंडितों को पंक्ति में ऊपर लाया गया। ऊपरी तल्ले पर लास्कार आदि सेवक जहाज धो रहे हैं। बढ़ते-बढ़ते सूरज का ताप प्रखर हो गया। आज बंदियों के मन बिखर रहे हैं कि कालापानी आएगा। यात्रा की धांधली में दबी हुई लाचारी, विरह तथा शोकपूर्ण विचार मेरे चित्त पर उमड़-उमड़कर ऊपर उठकर ह्नदय में घुसकर उसे चंचल बना रहे हैं, जैसे सागर की तलहटी की मछलियां उछल-उछलकर ऊपरी सतह में घुसती हैं। मैं कालेपानी की छांव से घिर गया हूं।
सागर शांत है,
सभी दंडितों को पंक्ति में ऊपर लाया गया। ऊपरी तल्ले पर लास्कार आदि सेवक जहाज धो रहे हैं। बढ़ते-बढ़ते सूरज का ताप प्रखर हो गया। आज बंदियों के मन बिखर रहे हैं कि कालापानी आएगा। यात्रा की धांधली में दबी हुई लाचारी, विरह तथा शोकपूर्ण विचार मेरे चित्त पर उमड़-उमड़कर ऊपर उठकर ह्नदय में घुसकर उसे चंचल बना रहे हैं, जैसे सागर की तलहटी की मछलियां उछल-उछलकर ऊपरी सतह में घुसती हैं। मैं कालेपानी की छांव से घिर गया हूं।
सागर शांत है,