गुलाम बनाए हुए है। यह मानव की जड़ सृष्टि पर प्राप्त कितनी बड़ी विजय है, कैसे कहें! एक दिन यही सूरज उस नूतन विजय की ओर, जो मनुष्य ने अपने मन पर प्राप्त की है, इसी तरह भौंचक्का होकर पृथ्वी की ओर देखता रहेगा। मनुष्य भी मन में विराजमान उस राक्षस पर विजय प्राप्त कर, पीड़क और पीड़ित को एक-दूसरे से छेदकर और अपने पैरों में पड़ी दासता की बेड़ियां तोड़कर मुक्त हो गया है, तथापि वह प्रेमपाश से परस्पर बंध गया है-हां, एक समय ऐसा भी आएगा-ऐसा
गुलाम बनाए हुए है। यह मानव की जड़ सृष्टि पर प्राप्त कितनी बड़ी विजय है, कैसे कहें! एक दिन यही सूरज उस नूतन विजय की ओर, जो मनुष्य ने अपने मन पर प्राप्त की है, इसी तरह भौंचक्का होकर पृथ्वी की ओर देखता रहेगा। मनुष्य भी मन में विराजमान उस राक्षस पर विजय प्राप्त कर, पीड़क और पीड़ित को एक-दूसरे से छेदकर और अपने पैरों में पड़ी दासता की बेड़ियां तोड़कर मुक्त हो गया है, तथापि वह प्रेमपाश से परस्पर बंध गया है-हां, एक समय ऐसा भी आएगा-ऐसा