ध्न्य दिवस न जाने कब उदित होगा जब यह सूर्य इस नूतन विजय से प्रमुदित होकर वसुंधरा की ओर इसी तरह देखता रहेगा। मानवजाति की स्वतंत्रता केवल मनुष्य मात्र के प्रेम की ही दासी रहेेगी। इस धन्य दिवस पर धन्य उन समस्त भुक्त-कष्टों तथा हुतात्माओं के कष्ट भोग तथा हौतात्म्य सफल होंगे, जिन्होंने यह धन्य दिन लाने के लिए आत्म-बलिदान किया है। समस्त मानव-जाति उनकी आभारी होगी। जिन्हें इस विजय का वह महान् श्रेय प्राप्त होनेवाला है, उनमें
ध्न्य दिवस न जाने कब उदित होगा जब यह सूर्य इस नूतन विजय से प्रमुदित होकर वसुंधरा की ओर इसी तरह देखता रहेगा। मानवजाति की स्वतंत्रता केवल मनुष्य मात्र के प्रेम की ही दासी रहेेगी। इस धन्य दिवस पर धन्य उन समस्त भुक्त-कष्टों तथा हुतात्माओं के कष्ट भोग तथा हौतात्म्य सफल होंगे, जिन्होंने यह धन्य दिन लाने के लिए आत्म-बलिदान किया है। समस्त मानव-जाति उनकी आभारी होगी। जिन्हें इस विजय का वह महान् श्रेय प्राप्त होनेवाला है, उनमें