के झाड़ूवाले भी मेरी ओर सहानुभूतिपूर्वक संकेत करके ‘बालिस्टर बाबू’ कहते हुए दया करते हैं। ये सेवक भी, जो पानी डालकर लकड़ियांॅ धो रहे हैं, दहाड़ते हैं- ‘ऐ कैदी, उठो इधर से। चलो, उधर बैठो।’ और मुझे उनका आदेश पालन करना होता है।
सागर शांत था। किसी साामुहिक दैत्य की तरह खर्राटे भर रहा था। वाष्पनौका फिसलती हुई किसी आसन्नमरण की नाड़ी सदृश मंद-मंद चल रही थी। ऊपर से सूर्य क्रूरतापूर्वक सभी पर अंगार बरसा रहा था। अत्यधिक गरमी थी,
के झाड़ूवाले भी मेरी ओर सहानुभूतिपूर्वक संकेत करके ‘बालिस्टर बाबू’ कहते हुए दया करते हैं। ये सेवक भी, जो पानी डालकर लकड़ियांॅ धो रहे हैं, दहाड़ते हैं- ‘ऐ कैदी, उठो इधर से। चलो, उधर बैठो।’ और मुझे उनका आदेश पालन करना होता है।
सागर शांत था। किसी साामुहिक दैत्य की तरह खर्राटे भर रहा था। वाष्पनौका फिसलती हुई किसी आसन्नमरण की नाड़ी सदृश मंद-मंद चल रही थी। ऊपर से सूर्य क्रूरतापूर्वक सभी पर अंगार बरसा रहा था। अत्यधिक गरमी थी,