यहां-वहां खाड़ियां और दलदल का साम्राज्य फेला हुआ है। इन खाड़ियों के जल में जंगल के सूखे पत्तों की एक के ऊपर एक परतें जमा होकर सड़ती हैं। इसी से मलेरिया का प्रादुर्भाव तथा प्रभाव अत्यंत कष्टप्रद होता है। मक्खियां जो इस मलेेरिया का प्रसार करती है, इधर इतनी विपुल और विविध जातियांे की हैं कि वर्णन करना असंभव है। कुछ भीतर की ओर मच्छर सदृश मक्खियां झंुड-के-झुंड इधर-उधर एक साथ गुनगुनाती हुई भिनभिनाती हैं जैसे तार में पिरोया हुआ
यहां-वहां खाड़ियां और दलदल का साम्राज्य फेला हुआ है। इन खाड़ियों के जल में जंगल के सूखे पत्तों की एक के ऊपर एक परतें जमा होकर सड़ती हैं। इसी से मलेरिया का प्रादुर्भाव तथा प्रभाव अत्यंत कष्टप्रद होता है। मक्खियां जो इस मलेेरिया का प्रसार करती है, इधर इतनी विपुल और विविध जातियांे की हैं कि वर्णन करना असंभव है। कुछ भीतर की ओर मच्छर सदृश मक्खियां झंुड-के-झुंड इधर-उधर एक साथ गुनगुनाती हुई भिनभिनाती हैं जैसे तार में पिरोया हुआ