जाल। कुछ बड़ी-बड़ी मक्खियां अपने लंबे-लंबे पैरों पर खड़ी रहकर इतनी तेजी से झूलती हैं कि उस दोलायमान अवस्था में यह कहना कठिन होता है कि वह एक काली रेखा है या मक्खी।
जोंक, साॅंप व कनखजूरे
जंगलों में इन मक्खियों के अतिरिक्त जो मलेरिया का प्रसार करती हैं-जोंकों की भी भरमार होती है। कीचड़ में, नीचे पड़े हुए पत्तों के ढेरों में ही नहीं अपितू वृक्षों की डालियों पर, पत्तों पर ये जोंके चिपकी रहती हैं। गरमी में दुबककर कहीं छिपी
जाल। कुछ बड़ी-बड़ी मक्खियां अपने लंबे-लंबे पैरों पर खड़ी रहकर इतनी तेजी से झूलती हैं कि उस दोलायमान अवस्था में यह कहना कठिन होता है कि वह एक काली रेखा है या मक्खी।
जोंक, साॅंप व कनखजूरे
जंगलों में इन मक्खियों के अतिरिक्त जो मलेरिया का प्रसार करती हैं-जोंकों की भी भरमार होती है। कीचड़ में, नीचे पड़े हुए पत्तों के ढेरों में ही नहीं अपितू वृक्षों की डालियों पर, पत्तों पर ये जोंके चिपकी रहती हैं। गरमी में दुबककर कहीं छिपी