की तुष्टि करते हैं। उनकी स्त्रियों में इक्की-दुक्की ललना विलास-लोलुप निकली तो
वृक्ष का एकाध पत्ता कटि के आगे लटका लेती। उन लोगों की स्वप्नसृष्टि को, जो आजीवन विलासिता का तिरस्कार करते हुए सादगीपूर्ण रहन-सहन की माला जपते हैं, वास्तविक रूप देने वाले ये जावरा सर्वथा वन्य स्थिति में हैं और नागरी तथा मानुषिक जीवन स्थित प्रलोभनों से अभी तक दूर रहे हैं। जब वे दियासलाई और वस्त्र नहीं जानते तथा बैलगाड़ियों से भी परिचित नहीं हैं,
की तुष्टि करते हैं। उनकी स्त्रियों में इक्की-दुक्की ललना विलास-लोलुप निकली तो
वृक्ष का एकाध पत्ता कटि के आगे लटका लेती। उन लोगों की स्वप्नसृष्टि को, जो आजीवन विलासिता का तिरस्कार करते हुए सादगीपूर्ण रहन-सहन की माला जपते हैं, वास्तविक रूप देने वाले ये जावरा सर्वथा वन्य स्थिति में हैं और नागरी तथा मानुषिक जीवन स्थित प्रलोभनों से अभी तक दूर रहे हैं। जब वे दियासलाई और वस्त्र नहीं जानते तथा बैलगाड़ियों से भी परिचित नहीं हैं,